24 February 2007

एक शेर

लातों के भूत बातों से नहीं मनते सोणिये,
और बातों के भूतों ने कभी लातों से नहीं माना पर्वेज़।

(with due apologies to my non-hindi reading friends)

3 comments:

Sreekumar said...

wah wah!
is the parwaiz, musharraf?

Rajesh said...

वाह उस्ताद वाह …… बहुत अछे ;-)

Mosilager said...

sreekumar shukriya and yes.

राजेश आदाब, और शुक्रिया।